01 मार्च, 2017

‘मिथुन’ लग्न की कुण्डली में ‘मंगल’ का फ़ल





अगर आपकी कुण्डली ‘मिथुन’ लग्न की है और आपको ये भी पता है कि उसमें ‘मंगल’ किस भाव में बैठा है, तो ये लेख आपको जरूर पढ़ना चाहिए; क्योंकि इसमें हम इसी बारे में बात कर रहे हैं।

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अब तक आप मेष और वृष लग्न की कुण्डली में क्रमश: गुरु और शनि के फ़ल के बारे में पढ़ चुके हैं। आज की कड़ी में ‘मिथुन’ लग्न की कुण्डली में ‘मंगल’ ग्रह का भाव-फ़ल लेकर मैं फ़िर आपके सामने प्रस्तुत हूँ।

‘मिथुन’ लग्न के लिए मंगल एक तरफ़ जहाँ लाभेश (ग्यारहवें भाव का स्वामी) होता है, वहीं दूसरी तरफ़ षष्ठेश भी होता है। यानि ऋण और लाभ दोनों लेकर आता है। अब आपकी किस्मत में क्या है, ये इस लेख को पढ़कर जानते हैं।



मिथुन लग्न के लिए मंगल ऋण और लाभ दोनों का वायस बनता है!



‘मिथुन’ लग्न की कुण्डली में ‘मंगल’ ग्रह के फ़ल को आप निम्न प्रकार जान सकते हैं : -

 

पहले भाव में : -


अगर मंगल पहले भाव में हो, तो जातक कूटनीति एवं चालाकियों से बहुत ज्यादा धन कमाता है और मस्ती के साथ ज़िन्दगी बिताता है। ऐसे व्यक्ति अपने शत्रु को दबाने में तो कामयाब हो जाते हैं, परन्तु अपनी पत्नी से उनकी पटरी नहीं खाती। ये लोग होशियार होने के साथ-२ कुछ रूखे भी होते हैं तथा इनका शरीर रोग-ग्रस्त होता है।

 

 

दूसरे भाव में : -


कर्क राशि में मंगल नीच का होता है। अत: दूसरे भाव में नीच का मंगल एक ओर जहाँ धन-संग्रह में परेशानी दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर कुटुम्ब की हानि भी करवाता है। ऐसे लोगों को परिश्रम करना बन्धन जैसा लगता है, ये गुप्त तरीकों से यहाँ-वहाँ करके ही पैसा कमाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को ननसाल पक्ष से भी कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं होता।

 

 

तीसरे भाव में : -


तीसरे भाव का मंगल खून में जोश पैदा करता है। ऐसे लोग अपनी हेकड़ी और मेहनत के बल पर जहाँ व्यवसाय में खूब धन कमाते हैं, वहीं दुश्मनों पर भी रौब गाँठ कर रखते हैं। ऐसे लोग राज-समाज, ननसाल पक्ष, एवं बीमारियों पर भी अपना अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं।

 

 

चौथे भाव में : -


‘मंगल’ भूमि, मकान, जमीन-जायदाद आदि का कारक होता है। अत: लाभ भाव का स्वामी होकर चौथे भाव में बैठा मंगल इन माध्यमों से कमाई के साधन पैदा करवाता है। ऐसे लोग अपने शत्रुओं से घबराते नहीं हैं, उल्टे वे उन्हीं से अपना फ़ायदा निकाल लेते हैं। इन्हें माता के सम्बन्ध में सुख और दु:ख दोनों उठाने पड़ते हैं।



तीसरे भाव में मंगल हेकड़ी से धन दिलाता है!



 

पाँचवे भाव में : -


अगर मंगल पंचम भाव में हो, तो व्यक्ति अपनी बुद्धि का उपयोग दूसरों पर गुस्सा निकालने व उनसे फ़ायदा उठाने में करता है। इन व्यक्तियों के बच्चे काफ़ी जिद्दी व हठीले होते हैं। ऐसे लोग अपना जीवन मस्ती में बिताते हैं तथा अपने दुश्मन को सहारा देने के बहाने उनसे भी फ़ायदा उठाते हैं।

 

छठे भाव में : -


जिन व्यक्तियों का मंगल छठे स्थान में वृश्चिक राशि में बैठा हो, उनकी देह कमजोर एवं रोग-ग्रस्त होती है। ऐसे लोग अपने शत्रुओं पर तो अपना दमखम दिखाते ही हैं; साथ ही, लाभ निकालने के लिए भी हेकड़ी दिखाने से बाज नहीं आते। ऐसे व्यक्ति अपने ननसाल पक्ष के भी प्रभाव का काफ़ी फ़ायदा उठाते हैं।

 

सातवें भाव में : -


मंगल यहाँ षष्ठेश होकर द्वितीय भाव को देख रहा है, अत: धन-संग्रह के मामले में जातक को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। चूँकि छठा भाव झगड़े-झंझट का एवं द्वितीय भाव कुटुम्ब का भी होता है, अत: परिवार में भी झगड़े एवं विवाद चलते ही रहते हैं। सातवें स्थान में बैठकर मंगल स्त्री से झगड़ा करवाता है तथा भोगादि एवं देह के मामले में रोग से भी सामना होता है।



नवें भाव का मंगल पूजा-पाठ में अनाप-शनाप खर्च करवाता है!



 

आठवें भाव में : -


मकर राशि में मंगल उच्च का होता है। आठवें घर में मकर का मंगल आयु में वृद्धि तथा दैनिक जीवन में बड़ा भारी प्रभाव देता है। ऐसा व्यक्ति अपने दुश्मनों से कूटनीति एवं छिपी हुई शक्तियों से काम निकालता है। ये लोग भाई-बहन से वैमनस्यता रखते हैं। इसी वजह से इन्हें अक्सर परिवार की कमी खलती है।

 

नवें भाव में : -


नवें भाव में कुंभ राशि का मंगल व्यक्ति को भाग्य के बल पर पैसा और प्रभाव दिलवाता है। ऐसे लोग ईश्वर में झूठी आस्था रखते हैं तथा दिखावा करने के लिए पूजा-पाठ के नाम पर अपना पैसा और वक्त बर्बाद करते हैं। इनके खर्च बहुत ज्यादा होते हैं, जिससे इन्हें अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

दसवें भाव में : -


जिन व्यक्तियों के दसवें भाव में मीन राशि का मंगल हो, वे अपने परिश्रम और अच्छे कर्मों के द्वारा राज-समाज से मान और इज्जत के साथ-२ धन भी प्राप्त करते हैं। ये अपना कारोबार भी करते हैं, तो मेहनत और आत्मबल के द्वारा उसे काफ़ी ऊँचाइयों तक ले जाते हैं। ऐसे लोग दिमाग के मामले में तो काफ़ी तेज होते हैं, परन्तु माता के सुख में किसी ना किसी प्रकार की न्यूनता अवश्य रहती है।



ग्यारहवें भाव में मंगल हो, तो बाधायें इनके सामने सिर झुकाती हैं!



 

ग्यारहवें भाव में : -


ग्यारहवें भाव में स्वराशि मेष का मंगल छप्पर फ़ाड़ के धन-सम्पत्ति देता है, परन्तु ये लोग उसे संचित करने के मामले में कच्चे साबित होते हैं तथा पानी की तरह अपना सारा पैसा बहा देते हैं। इन लोगों के लिए दिक्कतों तथा मुसीबतों से छुटकारा पाना बायें हाथ का खेल होता है।

 

बारहवें भाव में : -


जिन व्यक्तियों के बारहवें भाव में वृष राशि का मंगल हो, उन्हें आमदनी व लाभ के मामले में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को इन्द्रिय सम्बन्धी कुछ विकार भी होता है। अपने बहन-भाइयों से तो इनकी खटपट चलती ही रहती है तथा अपनी पत्नी से भी इनकी कोई खास नहीं बनती।


आज तो मिथुन लग्न वालों का दिन था; परन्तु आप परेशान मत होइये, कल आपका भी दिन आयेगा।


फ़िर मिलते हैं, विदा!


                                                                           आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                    गायत्री


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