06 फ़रवरी, 2017

कूट-मिलान (36 गुणों का मिलान) आखिर है क्या?





36 गुणों के मिलान को ‘अष्टकूट मिलान’ भी कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि इसमें वर और कन्या के किन गुणों का मिलान किया जाता है। आइये इस लेख में इसकी जाँच-पड़ताल करते हैं।

-----------------------------------------------------------------------------------------------


मैंने अपने एक लेख में बताया था कि ‘कुण्डली-मिलान’ केवल ३६ गुणों का मिलान ही नहीं है; बल्कि इसके अलावा भी और बहुत कुछ है, जो वर और कन्या की कुण्डली में देखना जरूरी है। लेकिन ये बात भी आप ध्यान में रखिए कि ‘अष्टकूट-मिलान’ के बगैर कुण्डली मिलान का कोई आधार ही नहीं है।

पारम्परिक मिलान अथवा कूट मिलान वर एवं कन्या की चन्द्र राशि अर्थात्‌ जन्म के समय कुण्डली में चन्द्रमा की स्थिति के आधार पर किया जाता है। चूँकि इसमें वर और कन्या के आपस में ८ गुणों का मिलान किया जाता है, इसलिए इसे अष्टकूट मिलान कहते हैं। ये आठ कूट एक निश्चित क्रम में होते हैं तथा इन्हें क्रमानुसार बढ़ते हुए क्रम में ही अंक प्रदान किये जाते हैं। इस प्रकार आठों कूटों के गुणों का योग ३६ होता है। अगर गुण मिलान में १८ से कम अंक प्राप्त हों, तो वर एवं कन्या परस्पर विवाह के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।

इन कूटों का विस्तार से आगे वर्णन किया गया है : -

 

(१)     वर्ण : -


यह दम्पत्ति के आध्यात्मिक विकास के स्तर को दर्शाता है। सभी राशियाँ वर्ण के आधार पर ४ भागों में विभाजित हैं। ४ (कर्क) / ८ (वृश्चिक) / १२ (मीन) राशियाँ विप्र / ब्राह्मण हैं; १ (मेष) / ५ (सिंह) / ९ (धनु) राशियाँ क्षत्रिय हैं; २ (वृष) / ६ (कन्या) / १० (मकर) राशियाँ वैश्य हैं तथा ३ (मिथुन) / ७ (तुला) / ११ (कुंभ) राशियाँ शूद्र हैं।

ब्राह्मण राशियाँ सबसे श्रेष्ठ मानी जाती हैं। जब वर का वर्ण कन्या के वर्ण के समान या उससे श्रेष्ठ हो, तो इसके लिए १ अंक दिया जाता है। कन्या का वर्ण श्रेष्ठ होने पर कोई अंक नहीं दिया जाता। वर-कन्या के वर्ण-मिलान को निम्न तालिका के द्वारा देख सकते हैं।


वर्ण-मिलान


(२)     वश्य : -


इसका तात्पर्य होता है : - नियंत्रण में होना; अर्थात्‌ कौन सी राशि किस राशि के नियंत्रण में है। जिसके अनुसार उन्हें अंक प्रदान किये जाते हैं। अधिकतम अंक २ होते हैं।

सभी राशियों को ५ वर्गों में विभाजित किया गया है। ये वर्ग इस प्रकार हैं : -

 

मनुष्य या द्विपद : -


मिथुन, कन्या, तुला, धनु का पूर्वार्द्ध एवं कुंभ।

 

चतुष्पद : -


मेष, वृष, धनु का उत्तरार्द्ध एवं मकर का पूर्वार्द्ध।

 

जलचर : -


कर्क, मकर का उत्तरार्द्ध एवं मीन।

 

वनचर : -


सिंह।

 

कीट : -


वृश्चिक।


वर-कन्या के वश्य-मिलान को निम्न तालिका के द्वारा देखा जा सकता है।


वश्य-मिलान


(३)     तारा : -


इस गुण के द्वारा वर और कन्या के नक्षत्रों की एक-दूसरे के प्रति शुभता / अशुभता को जाँचा जाता है। वर के नक्षत्र से वधू के नक्षत्र तक गिनने पर प्राप्त संख्या को ९ से भाग दें। यदि शेष ३, ५ या ७ आता है, तो अशुभ होता है तथा अन्य स्थितियों में तारा शुभ होता है। शुभ होने पर १.५ अंक तथा अशुभ होने पर शूण्य दिया जाता है।

यही प्रक्रिया कन्या के नक्षत्र पर भी दोहरायें। इसके पश्चात्‌ दोनों को प्राप्त अंकों को जोड़ दें।



(४)     योनि : -


यह मिलान एक-दूसरे के प्रति आकर्षण, प्रेम और शारीरिक-सम्बन्धों को परखने का जरिया है। इसमें सभी नक्षत्रों को विभिन्न जानवरों की योनियाँ प्रदान की गई हैं। यहाँ ये विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि वर और कन्या की योनि एक-दूसरे की शत्रु नहीं होनी चाहिए। नीचे दी गई तालिका में नक्षत्रों की योनि और उनकी शत्रु योनि का उल्लेख किया गया है : -


नक्षत्रों की योनि


योनि-मिलान के अधिकतम अंक ४ होते हैं। वर-कन्या के योनि-मिलान से प्राप्त अंकों को निम्न तालिका से देख सकते हैं : -


योनि-मिलान




(५)     ग्रह-मैत्री : -


इसके अन्तर्गत आपसी सामन्जस्य को परखा जाता है। इस मिलान के द्वारा वर और कन्या के राशि-स्वामी ग्रह की आपस में मित्रता को देखा जाता है, जिसे निम्न तालिका द्वारा दर्शाया गया है : - 


ग्रहों की मित्रता


इसके अधिकतम अंक ५ होते हैं। वर और कन्या के ग्रहों की आपसी मित्रता द्वारा प्राप्त अंकों को निम्न तालिका द्वारा देखा जा सकता है : -


ग्रह-मैत्री



(६)     गण : -


इसमें वर और कन्या के स्वभाव एवं एक-दूसरे के प्रति व्यवहार को परखा जाता है। सभी नक्षत्रों को देव, नर एवं राक्षस ३ गणों में बाँटा गया है : -

 

देव : -


अनुराधा, पुनर्वसु, मृगशिरा, श्रवण, रेवती, स्वाति, हस्त, अश्विनी और पुष्य नक्षत्र।

 

नर / मनुष्य : -


पूर्वाफ़ाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरा-फ़ाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी, भरणी और आर्द्रा नक्षत्र।

 

राक्षस : -


मघा, आश्लेषा, धनिष्ठा, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, विशाखा, कृतिका और चित्रा नक्षत्र।


इस मिलान के अधिकतम अंक ६ होते हैं। वर और कन्या के गण-मिलान से प्राप्त अंकों को निम्न तालिका से देखें : -


गण-मिलान


(७)     भकूट : -


भकूट मिलान के द्वारा विवाह के बाद पारिवारिक एवं आर्थिक समृद्धि को जाँचा जाता है। इस में वर और कन्या की राशियों की स्थिति एक-दूसरे के सन्दर्भ में देखी जाती है। यदि ये एक-दूसरे से २/१२, ५/९ या ६/८ अक्ष पर स्थित होती हैं, तो अशुभ होने के कारण इन्हें कोई अंक नहीं दिया जाता। अन्य स्थतियों में पूरे ७ अंक दिये जाते हैं।

भकूट दोष का कई स्थितियों में परिहार सम्भव है, जिस पर मैं आगे विस्तार से एक लेख लिखूँगी।


भकूट-मिलान


(८)     नाड़ी : -


नाड़ी मिलान उत्तम सन्तति के लिए आवश्यक समझा जाता है। इसमें सभी प्रकार के नक्षत्रों को ३ प्रकार की नाड़ियों में विभाजित किया गया है। ये इस प्रकार हैं : -

 

आद्य : -


अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा-फ़ाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद।

 

मध्य : -


भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफ़ाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा-भाद्रपद।

 

अन्त्य : -


कृतिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती।


यदि वर और कन्या की नाड़ी अलग-२ हों, तो उन्हें ८ अंक दिया जाता है; अन्यथा शून्य।


नाड़ी-मिलान



आशा है, आपको लेख पसन्द आया होगा। आपके सुझावों का भी स्वागत है। आप स्वयं कुण्डली मिलान भले ही ना कर पायें, पर इस लेख की सहायता से ‘३६ गुणों का मिलान’ अवश्य कर सकते हैं। आप सोच रहे होंगे कि जब इंटरनेट पर आसानी से और वो भी ‘मुफ़्त’ में ‘कुण्डली मिलान’ उपलब्ध है, तो फ़िर इतनी मेहनत क्यों की जाये? तो जनाब इतना ध्यान रखिये कि मुफ़्त सेवा प्रदान करने वाले परिहारों का ध्यान नहीं रखते। “अब ये ‘परिहार’ क्या बला है”, यही सोचा ना अभी आपने? इस पर आगे किसी लेख में बात करेंगे।


फ़िर मिलते हैं, विदा!


                                                                           आपकी शुभेच्छु
                                                                                  गायत्री


---------------------------------------------------------------------------------------------------
               
 
अन्य सम्बन्धित लेख :
 

कुण्डली मिलान कितना जरूरी?

मंगली होना अभिशाप नहीं!
                  
मेरा विवाह कब होगा?

विवाह का कोई मुहूर्त नहीं मिल रहा, क्या करें?
                                


                                 ********




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें