11 जनवरी, 2017

अपनी पसन्द नहीं, वास्तु के अनुसार सही रंग चुनें!





रंगों से चिकित्सा / उपचार के बारे में आपने अक्सर लोगों से सुना होगा, परन्तु क्या आप जानते हैं कि दिन-प्रतिदिन के जीवन में प्रयुक्त होने वाले रंग भी हम पर अच्छा / बुरा प्रभाव डालते हैं। इनके समुचित प्रयोग से हम अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।

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आपने सूर्य से आने वाले प्रकाश में उपस्थित ७ रंगों के बारे में अवश्य सुना होगा, परन्तु आप शायद इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि हमारे शरीर में भी ये ७ रंग विभिन्न अनुपात में मौजूद हैं तथा अत्यन्त शक्तिशाली रूप में हमारे शरीर व मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं।

ये रंग विभिन्न गुण-धर्म को धारण करते हैं, जिसके अनुसार हमारा स्वभाव व आंतरिक संरचना परिवर्तित होती रहती है। यहाँ एक बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि केवल आंतरिक ही नहीं, बल्कि हमारे आसपास / चारों तरफ़ मौजूद रंग भी हमें प्रत्यक्ष / परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।



इन्द्रधनुष की तरह हमारे जीवन को भी रंग ही खूबसूरती प्रदान करते हैं!



आइये, आपको इन रंगों के महत्व एवं प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं, ताकि आप अपने अनुकूल इनका प्रयोग कर सकें : -

 

१.     लाल रंग

 

सूर्य और मंगल ग्रह लाल रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वास्तु के अनुसार लाल रंग दक्षिण दिशा का स्वामी है। लाल रंग जोश, साहस, भावनाओं, प्रभुत्व और क्रांति का रंग है; इसलिए रक्तपात, झगड़ों और युद्ध के दौरान सर्वाधिक प्रदर्शित होता है।

लाल रंग निर्भयता, बल, साहस और सहनशक्ति देता है। जिन लोगों को ये रंग पसन्द होता है, वे इन विशेषताओं / गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सैनिकों, चिकित्सकों, इंजीनियरों और इलेक्ट्रीशियनों के लिए ये रंग काफ़ी उपयोगी होता है।

सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए लाल रंग और दक्षिण दिशा का उपयोग अधिक से अधिक करें। व्यायाम और नृत्य के दौरान लाल रंग का प्रयोग करने से भी गति और ऊर्जा की अधिकता रहती है।

हालांकि लाल रंग मंदबुद्धि और हीनता से ग्रस्त लोगों के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन पूरी तरह से विक्षिप्त लोगों को इससे दूर रखना चाहिए। यह रंग सुस्त और निष्क्रिय लोगों के लिए वरदान है तथा घावों को भी ये जल्दी ठीक करता है; किन्तु इसकी अधिकता से फ़ोड़े-फ़ुंसियाँ, खुजली तथा उच्च-रक्तचाप आदि रोग भी हो सकते हैं। जिन लोगों को इस तरह की कोई भी समस्या हो, वे बैंगनी, जामुनी, नीला आदि ठंडे रंगों के प्रयोग से काफ़ी हद तक इनसे छुटकारा पा सकते हैं।



बैंगनी रंग आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख करता है!



२.     नारंगी रंग

 

नारंगी रंग लाल और पीले रंगों से मिलकर बना है तथा व्यक्ति के सामाजिक सरोकार और मिलनसारिता बढ़ाने में सहायक होता है। ये रंग लोगों को विद्वान, आत्म-निर्भर, सहनशील तथा परोपकारी बनाता है तथा स्वतन्त्र विचारों का पोषक है।

इसकी कमी से खाँसी-जुकाम, बुखार, मूत्र-रोग, पथरी, माहवारी रुकना, अस्थमा तथा ऐंठन, जकड़न आदि समस्यायें हो सकती हैं। इनका निदान भी नारंगी रंग के अधिक से अधिक प्रयोग में निहित है। इसके लिए अपने कक्ष में सूर्योदय का चित्र लगाएँ तथा प्रतिदिन एक गिलास संतरे का जूस पिएँ।


३.     पीला रंग

 

पीले रंग के स्वामी ग्रह गुरु और मंगल हैं। गुरु का ग्रह होने के कारण ये भुखमरी और बदहाली दूर करके सुख और समृद्धि लाता है। यह रंग विद्वता और विशेष रूप से वैज्ञानिक बुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है।

रसोई-घर को पीले रंग से रंगना अच्छा रहता है, क्योंकि यह पेट और आँतों को शान्त करके कब्ज और माँसपेशियों में गड़बड़ी आदि को दूर करता है। अत्यधिक मोटे और माइग्रेन से पीड़ित लोगों के कमरे में पीला रंग करना लाभदायक रहता है।



विक्षिप्त लोगों को लाल रंग से दूर रखना चाहिए!



४.     हरा रंग

 

हरा रंग बुध ग्रह का रंग है। यह शांत, संतुलित और आरामदायक रंग है। सामान्यत: इसका प्रयोग बेडरूम में करना लाभदायक रहता है। इस रंग से प्रभावित लोग सदा जवान दिखना चाहते हैं तथा अपना प्रत्येक कार्य फ़ुर्ती से करते हैं। ये लोग वाक्‌पटु तथा भाषण-कला में माहिर होते हैं। इनका स्वभाव चतुर एवं व्यावसायिक योग्यता वाला होता है, इसलिए ये सहज ही सट्टेबाजी की ओर आकर्षित होते हैं।

मानसिक रूप से विकृत और विक्षिप्त लोगों की उग्रता को शान्त करने में हरा रंग काफ़ी सहायक होता है। उनके आसपास हरे रंग की अधिकता होनी चाहिए; जैसे, कमरे का हरा रंग, हरे रंग के पर्दे, चादरें और तकिए आदि। हम अपने घर में या बगीचे में पेड़-पौधे भी लगा सकते हैं।


५.     नीला रंग

 

नीला रंग गुरु के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसकी प्रकृति ठंडी है, जिसके परिणामस्वरूप यह ताप और क्रोध को शान्त करके पवित्रता, शान्ति और वफ़ादारी लाता है। यह रंग धर्म, धैर्य और आत्म-विश्लेषण का प्रतीक है, इसलिए प्रार्थना या ध्यान-कक्ष में हल्के नीले रंग का प्रयोग करना अच्छा रहता है।

गर्म क्षेत्रों या फ़िर गर्मियों में नीले रंग के कपड़े पहनना उपयुक्त रहता है, क्योंकि ये शरीर को ठंडा रखने में सहायक होते हैं। नीले रंग के अभाव या कमी से बहरापन या कान के अन्य रोगों की उत्पत्ति हो सकती है।



हल्के नीले रंग से रंगने पर कमरा ठंडा रहता है!



६.     जामुनी रंग

 

जामुनी रंग नीले और लाल रंगों से मिलकर बना है। इसमें नीला रंग आनुपातिक रूप से अधिक होता है। चूँकि शुक्र इस रंग का स्वामी ग्रह है; इसलिए सौन्दर्य, आनन्द, प्रसन्नता और उत्सव को आप इससे जोड़कर देख सकते हैं।

यह कलाकारों और संगीतकारों का रंग है, जो मैत्रीपूर्ण, शांतिपूर्ण और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के प्रशंसक होते हैं। इस रंग को आप अन्य किसी भी तरह प्रयोग करें, परन्तु इससे अपने घर की दीवारें कभी नहीं पेंट करनी चाहिए।

डायबिटीज के रोगियों के लिए ये रंग अमृत के समान प्रभाव रखता है। इसके उचित प्रयोग से नशाखोरी, निकम्मेपन और असमय बुढ़ापे पर भी काबू पाया जा सकता है।


७.     बैंगनी रंग

 

जामुनी की तरह बैंगनी रंग भी दो मूल रंगों लाल और नीले से मिलकर बना है, परन्तु इसमें लाल रंग अधिक मात्रा में मौजूद रहता है। शनि ग्रह इस रंग का स्वामी है, जो मितव्ययिता, धैर्य, सहनशीलता और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है। रोम साम्राज्य में ये रंग सर्वोच्चता का प्रतीक था और केवल राजा ही इसका प्रयोग कर सकते थे।

बैंगनी रंग व्यक्ति को आत्म-केन्द्रित और अंतर्मुखी बनाता है, इसलिए रिसर्च करने वाले और आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख व्यक्तियों के लिए ये अच्छा है; किन्तु सट्टेबाजी और शेयर-बाजार से जुड़े लोगों को इससे दूर रहना चाहिए। यह रंग सोचने और कार्य करने की प्रक्रिया को धीमा करता है, इसलिए इसके अधिक प्रयोग से व्यक्ति सुस्त, आलसी और निकम्मा हो जाता है।



गर्मियों में नीले रंग के कपड़े पहनना अच्छा रहता है!



ध्यान देने योग्य कुछ विशेष बातें

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१.    घर या कमरे में अपनी आवश्यकताओं, मौसम, आयु और इच्छाओं के अनुसार रंग और प्रकाश की व्यवस्था करनी चाहिए।

२.    छतों पर हमेशा सफ़ेद रंग करना चाहिए, ये मानसिक रूप से सकारात्मक प्रभाव देती है।

३.    किसी भी कमरे में सूर्य का प्रकाश कम आने पर हल्के रंगों से और ज्यादा आने पर उसे गहरे रंगों से रंगना चाहिए।

४.    यदि कमरे में उत्तर दिशा की ओर खिड़की, दरवाजे हों, तो उसे नीले रंग से ना रंगें; क्योंकि ऐसा कमरा प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है।

५.    यदि कमरे में दिन भर सूर्य की रोशनी रहती हो, तो उसमें पीला रंग करने से बचना चाहिए।



लेख तो यहाँ समाप्त हुआ, परन्तु हमारा साथ अभी भी बाकी है। वैसे रंगों का साथ किसे अच्छा नहीं लगता? कोशिश करें कि ये रंग आपके जीवन में दु:ख के बजाय खुशियों के वाहक बनें। अगर आपको इनके समुचित प्रयोग में किसी तरह की कोई शंका / उलझन हो, तो आप नि:संकोच मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं।



फ़िर मिलते हैं, विदा!



                                                                                 शुभेच्छा के साथ
                                                                                        गायत्री


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