03 जुलाई, 2016

महामृत्युंजय मंत्र को भी जानें!





‘महामृत्युंजय मंत्र’ जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है ‘मृत्यु को जीतने वाला मंत्र’। परन्तु क्या वाकई में ऐसा है? क्या इसके द्वारा आने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है? महामृत्युंजय मंत्र क्या है, इसका सार क्या है तथा इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे में, आइये इस लेख में जायजा लेते हैं।

 

महामृत्युंजय मंत्र


इस मंत्र को ‘त्र्यंबकम मंत्र’ या ‘मृत-संजीवनी मंत्र’ के रूप में भी जाना जाता है। यह मंत्र ऋग्वेद में सातवें मण्डल के ५९वें (उनसठवें) सूक्त के पहले मंत्र के रूप में विद्यमान है। शिव के मृत्युंजय स्वरूप को समर्पित यह मंत्र यजुर्वेद में भी पाया जाता है। चिंतन और ध्यान के लिए इस मंत्र को ‘गायत्री मंत्र’ के साथ उच्च स्थान प्राप्त है।



महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद के सातवें मण्डल में उल्लिखित है!



 

महामृत्युंजय मंत्र से आशय


आइये, आपको महामृत्युंजय मंत्र, इसके शब्दार्थ, भावार्थ और निहितार्थ के बारे में विस्तार से बताते हैं : -

 

मंत्र : -


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌॥


ऋषि – वसिष्ठ । देवता – रुद्र । छंद – अनुष्टुप । ऋग्वेद – (७।५९।१)

 

संपुटयुक्त : -


ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्‌॥

ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ




महामृत्युंजय मंत्र की रचना ऋषि वशिष्ठ ने की थी!



 

शब्दार्थ : -


त्र्यम्बकम्‌     -     त्र्यम्बक देव (महादेव)
यजामहे       -     हम उपासना करते हैं
सुगन्धिम्‌      -     श्रेष्ठ गन्ध से युक्त
पुष्टिवर्धनम्‌   -     पुष्टि (बल, तेज, वीर्य) को बढ़ाने वाले
उर्वारुकम्‌    -     ककड़ी
इव              -     की तरह
बंधनात्‌        -     बंधन से
मृत्यो:          -      मृत्यु के
मुक्षीय         -      मुक्त हो जायें
मा              -      नहीं
अमृतात्‌      -      अमृत से

 

भावार्थ : -


हे महादेव (तीन नेत्रों युक्त)! आप श्रेष्ठ गन्ध से युक्त एवं बल, वीर्य एवं तेज को बढ़ाने वाले हैं। अत: हम आपकी उपासना करते हैं कि आप हमें मृत्यु के भय से मुक्त कर दें। जिस प्रकार ककड़ी पक जाने पर स्वत: बेल से अलग हो जाती है, उसी प्रकार हम पूर्णायु भोगने के पश्चात सरल व स्वाभाविक रूप से बिना किसी भय के शरीर के बन्धन से मुक्त हो जायें। परन्तु आपसे ये प्रार्थना भी है कि आप हमें मृत्यु के बन्धन से मुक्त करें, अमृत अर्थात्‌ मोक्ष से नहीं। हमारी श्रेष्ठ गति आपके चरण कमलों के अमृत रस का पान करने में ही है।



महामृत्युंजय मंत्र में शिव से मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना की गई है!



 

निहितार्थ : -


आप सभी जानते हैं कि हमारी संस्कृति ‘आत्मा’ से सम्बद्ध है, जिसका समस्त चिंतन एवं ध्येय हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। महामृत्युंजय मंत्र भी इसी उद्देश्य से संपोषित है। इसमें तन-मन से स्वस्थ रहते हुये पूर्ण आयु की कामना की गई है तथा स्वाभाविक, पीड़ारहित एवं भय रहित मृत्यु के साथ-२ मोक्ष पाने की प्रार्थना एवं निवेदन इस मंत्र में समाहित है।


इस मंत्र को जानने के बाद आपके मन में ये प्रश्न अवश्य आया होगा कि इसका जाप कैसे करें। इसके बारे में हम पहले ही आपको विस्तार से जानकारी दे चुके हैं। साथ ही आपको ये भी बताया है कि मंत्रों का जाप खुद करें, किसी से करवायें नहीं।


फ़िर मिलते हैं। विदा!


                                                                             आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                      गायत्री


                                              ********


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