08 मई, 2016

जन्मकुण्डली क्या है?





आपमें से अधिकतर लोगों ने जन्मकुण्डली के बारे में सुना होगा या हो सकता है, देखा भी हो। जन्मकुण्डली ही वह खाका है, जिसे देखकर पंडित या ज्योतिषी हमारे जीवन की घटनाओं व आने वाले सुखों-दुखों का अनुमान लगाते हैं। हो सकता है आपके मन में भी कभी ये ख्याल आया हो कि आखिर इस जन्मकुण्डली का निर्धारण कैसे होता है, कैसे इस छोटे से खाने में किसी का पूरा जीवन समा जाता है? आइये आज हम जन्मकुण्डली से सम्बन्धित आधारभूत जानकारी से परिचित होते हैं।



जन्मकुण्डली हमारे भावी जीवन का नक्शा है!



 

जन्मकुण्डली का परिचय


जन्मकुण्डली और कुछ नहीं, किसी बच्चे के जन्म के समय कागज़ पर खींचा गया आकाश का नक्शा भर है। इसमें सभी ग्रह व राशियाँ उसी तरह बैठा दी जाती हैं, जिस स्थिति में वो उस समय आकाश में मौजूद होती हैं। हाँ ये बात भी दीगर है कि संसार के विभिन्न देशों व भारत के उत्तर-दक्षिण प्रान्तों में इसे बनाने का तरीका व पद्धति थोड़ी भिन्न है, परन्तु सभी पद्धतियों में राशियों और ग्रहों की स्थिति वही रहती है, उसमें कोई बदलाव सम्भव ही नहीं है।

 

लग्न एवं भाव के बारे में


प्रत्येक कुण्डली में १२ खाने होते हैं, जिन्हें ‘भाव’ कहा जाता है। कुछ लोग इन्हें घर या स्थान से भी सम्बोधित करते हैं। कुण्डली के प्रत्येक भाव पर एक राशि का आधिपत्य होता है और प्रत्येक व्यक्ति के मामले में ये अलग-२ होती हैं। अन्य शब्दों में कहें, तो प्रत्येक भाव की स्वामिनी एक निश्चित राशि होती है। किसी बच्चे के जन्म के समय भचक्र पर जो राशि उदित होती है, उसे ‘लग्न’ कहा जाता है; यही राशि उसकी कुण्डली के पहले भाव की स्वामिनी होती है। अन्य राशियाँ क्रम से कुण्डली के शेष भावों का आधिपत्य ग्रहण करती हैं।



जन्म के समय भचक्र पर उदित राशि लग्न कहलाती है!



उदाहरणस्वरूप, माना किसी के जन्म के समय भचक्र पर वृश्चिक राशि का उदय हो रहा था, तो उसकी लग्न वृश्चिक हुई। चूँकि वृश्चिक क्रम संख्या में आठवीं राशि है, इसलिए प्रथम भाव में ८ अंक लिखा जायेगा, फ़िर अन्य राशियाँ क्रम से ९, १०, ११ आदि (एण्टी-क्लॉक वाइज) १ले, २रे, ३रे आदि भावों में लिखी जायेंगी। इस तरह सभी १२ भावों में सभी १२ राशियाँ लिख देने से कुण्डली का आधारभूत ढाँचा तैयार हो जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रत्येक २ घण्टे पश्चात्‌ भचक्र पर क्रम से राशियों का उदय होता है। इस तरह प्रत्येक दिन २४ घण्टे में १२ राशियाँ क्रम से उदित होती हैं। इसलिए एक दिन में जन्म लेने वाले व्यक्तियों की राशि हो सकता है, एक ही हो; परन्तु उनकी लग्न हर २ घण्टे पर बदलती रहती है। फ़लस्वरूप उनकी कुण्डली भी अलग-२ होती है।



प्रत्येक कुण्डली में १२ खाने होते हैं, जिन्हें ‘भाव’ कहा जाता है!



 

ग्रहों की स्थिति


इस तरह कुण्डली में राशियों को बैठाने के बाद ग्रहों को बैठाने की बारी आती है। बच्चे के जन्म के समय आकाश में उपस्थित सभी ९ ग्रह जिन-२ राशियों में जिन-२ अंशों पर स्थित होते हैं, कुण्डली में भी उन्हें उसी राशि और अंशों पर बैठा दिया जाता है। ग्रहों की उच्च-नीच स्थिति व ये किस प्रकार का फ़ल देंगे, ये देखना तो खैर बाद की बात है।

इस प्रकार कुण्डली का मुख्य खाका तैयार हो जाता है। बाद में दशाओं आदि की गणना करके फ़लकथन की विभिन्न पद्धतियों से जातक के भविष्यकथन की पृष्ठभूमि तैयार की जाती है।


अब तो आप नहीं कहेंगे ना कि कुण्डली-वुण्डली आपके समझ से बाहर की चीज़ है। आप हमारे साथ जुड़े रहिए; फ़िर देखिए हम ज्योतिष के कैसे-२ राज़ आपके साथ शेयर करते हैं।


फ़िलहाल तो इज़ाज़त दीजिए; फ़िर मिलते हैं। विदा!


                                                                           आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                    गायत्री



                                             ********

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें