16 मार्च, 2016

मेरा विवाह कब होगा?





एक कहावत प्रचलित है कि “शादी का लड्डू, जो खाये वो पछताये; जो ना खाये, वो भी पछताये” .. और हमारे भारतीय समाज में तो लोग इस लड्डू को खाकर पछताना ज्यादा पसन्द करते हैं। .. :)) .. खैर! मजाक की बात एक तरफ़। दरअसल हमारे समाज में ‘विवाह होना या ना होना’ एक अहम मसला है। खासकर किसी लड़की का विवाह समय पर ना हो, तो माता-पिता दिन-रात इसी चिन्ता में घुलते रहते हैं। यहाँ तक कि लड़कों और लड़कियों के मन में भी अक्सर यही सवाल कुलाचें मारता रहता है कि आखिर ‘मेरा विवाह कब होगा’?



‘शादी’ हमारे भारतीय समाज के लोगों की चिन्ता का सबसे बड़ा विषय है!



 

विवाह के लिए उत्तरदायी ग्रह एवं भाव


कुण्डली में सातवाँ घर जीवनसाथी का होता है। अत: सातवाँ भाव व इसका स्वामी ग्रह (सप्तमेश) विवाह में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ‘शुक्र’ को विवाह का ‘कारक ग्रह’ माना जाता है; इसीलिए इसकी भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। लड़कियों की कुण्डली में ‘गुरु’ की स्थिति भी देखना जरूरी है, क्योंकि ये पति का कारक है। अगर प्रेम-विवाह है, तो पंचम भाव व पंचमेश की भूमिका भी विवाह के समय कुण्डली में दिखाई देगी।



कुण्डली का ‘सप्तम भाव’ हमारे वैवाहिक जीवन का आईना होता है!



 

क्या कुण्डली से जीवन-साथी के विषय में जान सकते हैं?


युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही हर कोई, चाहे वो लड़का हो या लड़की, अपने जीवन-साथी के बारे में जानने को उत्सुक हो उठता है कि ‘आखिर वो कैसा होगा’? अगर आपको ये पता चले कि कुण्डली से जीवनसाथी के कद, रंग-रूप, स्वभाव, चरित्र, आर्थिक-स्थिति, परिवार आदि के सम्बन्ध में सब कुछ जाना जा सकता है, तो शायद आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। यहाँ तक कि आप ये भी जान सकते हैं कि अपने पति / पत्नी के साथ आपके सम्बन्ध कैसे रहेंगे तथा ससुराल वालों के साथ आपकी पटरी बैठेगी या नहीं?



‘शनि महाराज’ विवाह में देरी करवाने का उत्तरदायित्व अपने सिर पर ढोये घूमते हैं!



 

कहीं ससुराल ठीक ना मिला तो?


कुछ घरों में माता-पिता ये सोच-२ कर परेशान रहते हैं कि पता नहीं उनकी बेटी का ससुराल कैसा होगा? उनकी नाजों में पली बेटी अमीर घर जायेगी या किसी गरीब के घर की शोभा बनेगी? उनकी बेटी का ससुराल करीब ही होगा या ब्याह के बाद वो उन्हें छोड़कर परदेश चली जायेगी। बेहतर होगा आप परेशान होने के बजाय किसी अच्छे ज्योतिषी के पास जाकर ये सब पूछ लें, क्योंकि आपकी बेटी की कुण्डली से ये बातें पता लगाई जा सकती हैं।

 

विवाह देर से होगा या जल्दी?


जैसा कि मैंने शुरुआत में ही बताया कि सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु विवाह के लिए उत्तरदायी होते हैं; तो फ़िर विवाह जल्दी होगा या देर से, ये भी इन्हीं पर निर्भर करेगा। यदि ये ग्रह एवं भाव पाप ग्रहों से पीड़ित हैं, तो विवाह में देरी होगी तथा इन पर शुभ ग्रहों का प्रभाव विवाह जल्दी करा सकता है। खासतौर पर ‘शनि’ विवाह में ‘विशेष देरी’ करवाता है, क्योंकि ये एक धीमा ग्रह है।



आप कुछ भी कर लें, परन्तु अपने विवाह का समय नहीं बदल सकते!



मैं एक बात यहाँ विशेष रूप से कहना चाहूँगी कि आपका विवाह कितनी ही देर से हो, चाहे आपकी ज़िन्दगी का मकसद विवाह करना ही क्यों ना हो? आप इसके लिए किसी मूर्ख ज्योतिषी या पोंगा-पण्डितों के चक्कर ना काटें, क्योंकि विवाह जब होना होगा, तभी होगा। उनके कुछ करने या आपके कुछ करने से कुछ नहीं होने वाला।


अच्छा यही होगा कि एक कुशल ज्योतिषी के पास जाकर अपने विवाह की सही उम्र पता करें और तब तक अपने आप को किन्हीं अन्य कामों में व्यस्त रखें, तभी आपका जीवन खुशहाल रह पायेगा।



आप अपनी किसी भी उत्कण्ठा के समाधान हेतु मुझसे कभी भी सम्पर्क कर सकते हैं। आपके सुखद भावी जीवन की अग्रिम मंगलकामनाओं सहित,



                                                                           आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                    गायत्री



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