25 फ़रवरी, 2016

वास्तु-सुझाव : फ़्लैट खरीदने से पहले कुछ बातें अवश्य ध्यान रखें!





एक तरफ़ सुरसा के मुँह की तरह बढ़ती जनसंख्या और दूसरी तरफ़ जमीन की लगातार आसमान छूती कीमतें, इन दोनों ही बातों ने हमारी आधुनिक जीवन-शैली में ‘फ़्लैट-संस्कृति’ को जन्म दिया है। इसके अतिरिक्त आजकल की भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में किसके पास इतना समय है कि पहले जमीन खरीदे, फ़िर दिन-रात एक करके उस पर अपना मकान बनाये। लोगों के लिए ज्यादा आसान हो गया है कि किसी रिहायशी इलाके के किसी शानदार अपार्टमेण्ट में फ़्लैट खरीदा जाये और माकूल समय देखकर उसमें शिफ़्ट कर जायें। हो सकता है, आप भी कुछ ऐसा ही प्लान बना रहे हों। परन्तु सावधान! ऐसा कुछ करने से पहले एक बार इस लेख को जरूर पढ़ लें। आपके ही फ़ायदे के लिये है जी।

 

फ़्लैट का आकार कैसा हो?


सबसे पहले आकार पर ध्यान देना जरूरी है। फ़्लैट किसी भी मंजिल पर हो, उसका आकार वर्गाकार या आयताकार ही हो। अगर फ़्लैट का आकार आयताकार है, तो उसकी लम्बाई, चौड़ाई की डेढ़-गुनी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

वास्तु में ऐसा माना जाता है कि वर्गाकार भवन पुरुषोचित तथा आयताकार भवन स्त्रियोचित स्वभाव को धारण करने वाले होते हैं। जाहिर है, आप अपने फ़्लैट में जिस तरह की ऊर्जा का बहाव पसन्द करेंगे, वैसा ही घर भी अपने लिए चयनित करेंगे।



आजकल घर बनाने की अपेक्षा किसी अपार्टमेण्ट में फ़्लैट लेना लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है!



 

निर्माण में प्रयुक्त सामग्री कैसी होनी चाहिए?


वास्तु-शास्त्र के अनुसार किसी भी भवन के निर्माण में प्रयुक्त प्रत्येक सामग्री अपने भीतर एक विशेष प्रकार की जैविक ऊर्जा को धारण करती है। आजकल भवनों के निर्माण में पथरीली कंक्रीट (RCC), लोहे, स्टील, काँच एवं अन्य सिंथेटिक सामग्री का प्रयोग बहुतायत से हो रहा है, क्योंकि बहुमंजिली इमारतों के निर्माण के लिए मजबूत ढाँचे की आवश्यकता होती है। परन्तु ऐसा करके लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, क्योंकि इन पदार्थों से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा इन इमारतों के परिसर में रहने वाले लोगों में अनेक बीमारियाँ तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी कई परेशानियों को जन्म देती है।

भवन के निर्माण में प्रयुक्त भारी स्टील एक विशाल चुम्बक की तरह प्रतिक्रिया देती है तथा अपने आसपास के लोगों पर एक चुम्बकीय प्रभाव छोड़ती है। कंक्रीट एक मृत सामग्री की तरह व्यवहार करके गलत वातावरण निर्मित करती है। ग्रेनाइट पत्थर नसों में रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध करता है।

स्पष्ट है कि इस बात का ध्यान रखें कि फ़्लैट के निर्माण में ईंट तथा बलुआ एवं संगमरमर जैसे प्राकृतिक पत्थरों का इस्तेमाल किया गया हो। ये सामग्री घर में रहने वाले लोगों पर शुभ प्रभाव डालती है। काँच या शीशे का प्रयोग भी किसी भी इमारत में कम से कम ही किया जाना चाहिए।



किसी भी भवन के निर्माण में कंक्रीट, काँच और स्टील का कम से कम प्रयोग करना ही हितकर है!



 

किन बातों का रखें ध्यान?



१.    अपार्टमेण्ट के उत्तर या पूर्व में मार्ग होना अच्छा माना जाता है तथा पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा वाले फ़्लैट अन्य फ़्लैटों से बेहतर माने जाते हैं।

२.    किसी ऐसे अपार्टमेण्ट में फ़्लैट ना लें, जिस पर किसी अन्य ऊँची इमारत की सदैव छाया पड़ती हो।

३.    अपार्टमेण्ट के ठीक सामने कोई बड़ा अस्पताल या कब्रिस्तान नहीं होना चाहिए।

४.    अपार्टमेण्ट के परिसर में कोई मंदिर भी नहीं होना चाहिए।

५.    अपार्टमेण्ट में सभी के द्वारा प्रयुक्त चीजें / सामग्री जैसे; सीढियाँ, लिफ़्ट, पानी की टंकी, बोरिंग, पार्किंग, चौकीदार का स्थान आदि भी वास्तु-सम्मत ही होनी चाहिए।

६.    उसी फ़्लैट का चयन करें, जिसकी उत्तर / पूर्व दिशा में या तो मुख्य द्वार हो या बड़ी खुली बालकनी हो; ताकि प्रात:कालीन प्रकाश की किरणें और ताजी हवा बहुतायत में प्राप्त हो सके।

७.    जिस फ़्लैट के ऊपर पानी की टंकी हो, उसे बिल्कुल ना खरीदें, क्योंकि रिसाव / सीलन का खतरा हमेशा बना रहता है। अन्य कारणों से भी भवन में किसी भी प्रकार का रिसाव / सीलन नहीं होना चाहिए।

८.    वह फ़्लैट उत्तम रहता है, जिसमें प्राकृतिक रोशनी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो तथा दिन के समय किसी भी प्रकार के कृत्रिम प्रकाश की आवश्यकता ना पड़े।

९.    शौचालय प्रवेश-द्वार के समीप ना हो और ईशान कोंण में तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा है, तो ऐसे फ़्लैट को बिल्कुल ना खरीदें।


वैसे तो कोई भी फ़्लैट पूर्ण-रूप से वास्तु-सम्मत होना मुश्किल होता है; लेकिन अगर फ़्लैट का तीन-चौथाई हिस्सा भी वास्तु-सम्मत है, तो उसे खरीदा जा सकता है। वैसे भी कई दोषों को काफ़ी हद तक वास्तु उपायों द्वारा दूर किया जा सकता है। इन वास्तु उपायों से हम आपको समय-२ पर परिचित कराते ही रहते हैं। आगे भी कराते ही रहेंगे; बस आप हमारे साथ जुड़े रहिये।


                                                                              शुभेच्छा सहित
                                                                                   गायत्री

                       
                                                ********

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें