07 फ़रवरी, 2016

घर का मुख्य द्वार कैसा होना चाहिए?




किसी भी घर के प्रवेश / मुख्य द्वार का वास्तु-शास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें प्रवेश द्वार को ‘मुख’ की संज्ञा दी गई है। एक कहावत प्रचलित है, ‘जैसा खाओ अन्न, वैसा होवे मन’, अर्थात् किसी भी व्यक्ति के आचरण या मर्यादित व्यवहार के लिए उसके द्वारा ग्रहण किए जाने वाला अन्न ही उत्तरदायी होता है। उसी प्रकार किसी भी घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक / नकारात्मक ऊर्जा उस घर के प्रवेश द्वार / मुख्य द्वार के वास्तु पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त चूँकि मुख्य द्वार, गृह-स्वामी की समृद्धि और वैभव का भी प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे अन्य द्वारों की अपेक्षा बड़ा, सुन्दर और सुरुचिपूर्ण होना ही चाहिए।

यदि घर का प्रवेश द्वार वास्तु के नियमों के अनुसार हो, तो उसमें रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य और समृद्धि की सौगात लेकर आता है। वास्तु के ये सिद्धान्त पूर्णतया वैज्ञानिक और तर्क-संगत होते है।

 

मुख्य-द्वार हेतु वास्तु-सम्बन्धी विशेष / प्रधान नियम



१.    मुख्य-द्वार के लिए ‘पूर्व दिशा’ सर्वोत्तम दिशा है, क्योंकि इस दिशा से प्रवेश करने वाली सूर्य की किरणें परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्यप्रद होती हैं। दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोंण) में प्रवेश-द्वार कभी ना बनायें।

२.    मुख्य द्वार एकदम मध्य या कोने में नहीं होना चाहिए तथा इसे घर के अन्य द्वारों की अपेक्षा अनुपात एवं आकार में बड़ा होना चाहिए।


मुख्य-द्वार से पहले कुछ-एक सीढ़ियाँ होना आवश्यक हैं!


३.    मुख्य द्वार का सम्बन्ध घर के अन्य सभी हिस्सों से भली-भाँति होना चाहिए, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश एवं फ़ैलाव सुचारु ढंग से हो सके।

४.    मुख्य द्वार के सामने द्वार की ऊँचाई से दुगुनी से भी अधिक दूरी तक का फ़ैलाव / स्थान खाली छूटा होना चाहिए; वहाँ निम्न वस्तुओं / निर्माण के होने से वेध / रुकावट होती है, जो आगे चलकर अशुभ फ़लदायक सिद्ध होती है : -

A.    पेड़, कोई खम्भा, दीवार, चट्टान, सामने वाले मकान का कोना या सीढ़ियाँ, जेनरेटर, खड़ी कार।

B. कीचड़, कुआँ, खुला नाला, गड्ढा, पानी की टंकी, हैण्ड-पाइप।

C. खाई, मंदिर, चींटियों की बांबी, राख का ढेर, कचरा घर, जर्जर इमारत, सीधा मार्ग या सड़क।

D. मकान के सामने कोई जानवर (गाय, भैंस, बकरी इत्यादि) ना बाँधें और ना ही इसके लिए कोई खूँटा गाड़ें।

E.  घर के मुख्य द्वार पर किसी वृक्ष, मंदिर या उसके ध्वज की छाया भी नहीं पड़नी चाहिए।


दहलीज / चौखट युक्त मुख्य-द्वार शुभता लाता है!


५.    मुख्य द्वार का दरवाजा अपने-आप खुलने व बन्द होने वाला नहीं होना चाहिए तथा इसे खोलते व बन्द करते समय इसमें से कोई आवाज भी नहीं निकलनी चाहिए।

६.    मुख्य द्वार इतनी ऊँचाई पर हो कि वहाँ तक पहुँचने के लिए कुछ सीढ़ियों की आवश्यकता पड़े।

७.    मुख्य द्वार का दरवाजा हमेशा अन्दर की ओर एवं घड़ी के चलने की दिशा में (Clock-wise) ही खुलना चाहिए।

८.    घर के दरवाजों की कुल संख्या सम होनी चाहिए, परन्तु ये शूण्य से अन्त होने वाली संख्या – यानि १०, २०, ३० आदि बिल्कुल ना हो।

९.    मुख्य द्वार दहलीज या चौखट से युक्त हो, तो शुभ माना जाता है; परन्तु आजकल इसे लगवाने का फ़ैशन नहीं है।

१०.    मुख्य द्वार कभी भी गोल, वर्गाकार, त्रिकोंण या बहुभुज ना रखकर, हमेशा आयताकार ही बनवाएँ तथा इसकी चौड़ाई, इसकी ऊँचाई से आधी होनी चाहिए।


प्रवेश-द्वार के सामने सीढ़ियाँ होने पर वास्तु उपाय अपनाएँ!


११.    घर के मुख्य द्वार के सामने रसोई कभी नहीं बनवानी चाहिए; परन्तु अगर ऐसा है, तो रसोईघर के दरवाजे पर पर्दा डाल दें।

१२.    मुख्य द्वार के सामने या आसपास शौचालय नहीं होना चाहिए क्योंकि शौचालय द्वारा उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देगी।

१३.    घर के अन्दर की तरफ़ से मुख्य द्वार के बायीं ओर पानी या जल का कोई भी स्रोत होना अत्यन्त मंगलकारी माना जाता है; पर ये द्वार के दोनों ओर नहीं होना चाहिए।

१४.    वास्तु के अनुसार कोनों का अभाव अशुभ माना जाता है। अत: किसी भी स्थिति में घर के किसी भी कोने को काटना नहीं चाहिए।


 

मुख्य द्वार के वास्तु दोष सुधारने हेतु उपाय



१.    घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ़ हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह या ॐ बनायें। अगर सम्भव हो, तो यदा-कदा या नियमित रूप से बाहर प्रवेश द्वार के सामने रंगोली अवश्य बनायें।


मुख्य-द्वार पर विंड-चाइम लगाने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती!


२.    प्रात: उठकर सबसे पहले मुख्य द्वार के सामने जल छिड़कना चाहिए, जिससे एकत्रित हुई नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जायेगी।

३.    यदि घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने सीढ़ी हो, तो मुख्य द्वार और सीढ़ी के बीच कोई भी पार्टीशन या पर्दा लगा दें।

४.    मुख्य द्वार पर विंड-चाइम लगायें, जो घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोकने का कार्य करेगी। विंड-चाइम की जगह क्रिस्टल-बॉल भी लगा सकते हैं।

५.    मुख्य द्वार पर लाल रंग का फ़ीता बाँधें व बाहरी दीवार पर एक पाकुआ दर्पण लाकर लगा दें।



इस प्रकार आप अपने घर का मुख्य द्वार सजा-सँवार कर लोगों के बीच अपनी धाक जमा सकते हैं। परन्तु इन सबके बीच हमें मत भूल जाइयेगा और यहाँ लगातार आते रहिएगा।


                                                                            आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                      गायत्री


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