13 दिसंबर, 2015

वास्तु आखिर है क्या?




अगर आपने रामायण पढ़ी है, तो आपको वो प्रसंग भली-भाँति याद होगा, जब वन-गमन के दौरान श्री राम जी महर्षि वाल्मीकि से रहने के लिए कुटी के निर्माण की बात कहते हैं और उनसे कुटी के स्थान, दिशा तथा अन्य बातों के सम्बन्ध में परामर्श माँगते हैं। इस प्रसंग से अब आप इस बात से इन्कार नहीं करेंगे कि वास्तु, शास्त्र-सम्मत है। आज इस लेख में हम इसी बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.....


वास्तु से तात्पर्य


पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश के बीच प्रकृति में सन्तुलन बनाये रखने हेतु परस्पर क्रिया होती है, इसे ही वास्तु के नाम से जाना जाता है। वास्तु ज्योतिष के अनुसार इस प्रक्रिया का प्रभाव मनुष्य एवं अन्य प्राणियों के जीवन से सम्बन्धित सभी पहलुओं पर पड़ता है।

वास्तु का शाब्दिक अर्थ निवास स्थान होता है। इसके सिद्धान्त एवं नियम वातावरण में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों के बीच एक सामंजस्य स्थापित करते हैं, जिससे हम नकारात्मक तत्वों से दूर सुरक्षित वातावरण में रह सकें।



पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश के मध्य पारस्परिक-क्रिया ही वास्तु है!



क्यों होता है वास्तु-दोष


वास्तु-दोष वातावरण में सामंजस्य की कमी, आसपास की खराब भूमि, भवन-निर्माण की कमी, घर में रखे सामानों की गलत दिशा की वजह से उत्पन्न होते हैं। किसी भी घर के वास्तु को निम्न बातें प्रभावित करती हैं:-

१.    मकान किस तरह की भूमि पर स्थित है तथा उस भूमि का आकार-प्रकार क्या है?

२.    भवन के किस हिस्से में निर्माण ज्यादा और किस हिस्से में कम है तथा किस दिशा में खुला स्थान है?

३.    भवन में प्रकाश और वायु के आगमन और निकास की व्यवस्था कैसी है?


किसी भी घर का वास्तु कई बातों पर निर्भर करता है!


४.    भवन में कमरे, खिड़कियाँ, जल व मल निकास, प्रवेश द्वार आदि किस प्रकार संयोजित हैं?

५.    भवन के किस हिस्से में परिवार का कौन सा व्यक्ति रहता है?

६.    भवन के आसपास की अन्य इमारतें तथा वातावरण किस प्रकार का है?

वास्तु-शास्त्र में उपर्युक्त सभी बातों के लिए नियम बनाये गये हैं।इन नियमों का पालन ना होने से उत्पन्न होने वाले दोष ही वास्तु-दोष कहलाते हैं। वास्तु-दोष गम्भीर दुष्परिणामों का वाहक बन जाते हैं। अत: इनका तुरन्त निदान आवश्यक है। इनके निदान के लिए वास्तु शास्त्र में अनेक उपाय सुझाये गये हैं। इन उपायों तथा वास्तु के नियमों के बारे में हम आपको आगे अनेक लेखों में विस्तार से समझायेंगे तथा भवन-निर्माण सम्बन्धी अनेक जानकारियाँ भी देंगे। आप हमारे साथ बने रहिए तथा सभी लेखों को ध्यान से पढ़िए। आपके सुझावों का हमेशा स्वागत रहेगा।

                                                                शुभेच्छा के साथ
                                                                      गायत्री

                                          **********

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें