28 दिसंबर, 2015

मंगली होना अभिशाप नहीं है!




विवाह से जुड़ी अनेक समस्याओं में से एक प्रमुख समस्या जो अक्सर लोगों को परेशान किए रहती है, वो है लड़के या लड़की का मंगली होना। परन्तु क्या मंगली होना वास्तव में इतना अमंगलकारी है, जितना भय लोगों के मन में बैठा दिया गया है। किसी भी घर में अगर एक संतान भी मंगली पैदा हो जाए; खासतौर पर अगर वो लड़की हो, तो माँ-बाप की रातों की नींद हराम हो जाती है।

और शायद आपको इस भय से छुटकारा दिलाना इतना आसान भी नहीं होगा मेरे लिए, आखिर 'मंगल-महाराज' जो ठहरे। कहीं मुझ पर ही अपना प्रकोप ना दिखा दें कि मैंने आपको उनके भय से छुटकारा क्यों दिला दिया। .. :))

वैसे मंगल-महाराज इतने बुरे भी नहीं है, आखिर वे मंगलकारी भी हैं और मांगल्य भी तो उन्हीं से है।

 

आखिर मंगली-दोष कब होता है?


अब आते हैं इस बात पर कि आखिर मंगली-दोष है क्या?
जब किसी कुंडली में मंगल पहले, २रे, ४थे, ७वें, ८वें और १२वें भाव में विराजमान हों, तो उसे मंगली-दोष माना जाता है। चूँकि ये भाव क्रमशः शरीर, कुटुंब, सुख, विवाह, सौभाग्य और शयन-सुख के माने जाते हैं, अतः यहाँ पर मंगल जैसे पापी ग्रह का होना अच्छा नहीं माना जाता। ये मानते हैं कि मंगल अपनी क्रूरता से इन भावों को पीड़ा पंहुचाते हैं।


कुछ विशेष भावों में मंगल ग्रह का बैठना ‘मंगली-दोष’ माना जाता है?


 

मंगली-दोष और इसके निवारण की वास्तविकता


मंगली दोष के निवारण के लिए पूजा-पाठ के अलावा ये भी माना जाता है कि यदि कुण्डली में मंगल के साथ कोई दूसरा पापी ग्रह बैठा हो या उसे देख रहा हो, तो मंगली दोष खत्म हो जाता है। पर क्या दो पापी ग्रह मिलकर उसे ज्यादा खतरनाक नहीं बना देंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि अगर लड़की की कुंडली में ७वें या ८वें भाव में दो पापी ग्रह बैठ जाएँ, तो ये वैधव्य-योग बन जाता है।

मेरा एक अन्य तर्क ये है कि मंगल ही क्यों? शनि और राहू तो इनसे भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, उनका दोष क्यों नहीं माना जाता? वैसे ये बात शायद आपके गले से ना उतरे, लेकिन यदि 'गुरु' विवाह के घर में अन्य पापी ग्रहों से पीड़ित हो, तो मंगल से ज्यादा भयानक परिणाम दे सकता है।


मंगली होने का डर बेवजह ही लोगों के मन में बैठा दिया जाता है!


एक अन्य प्रश्न जो मुझे परेशान करता है, वो ये कि अगर १२ में से ६ घरों में मंगल होने से पीड़ा है, फिर तो विश्व के आधे लोगों की कुंडली खराब हो गयी और उनका वैवाहिक-जीवन नरक? एक मजे की बात बताऊँ, एक बार मेरे पड़ोस में 'पंडित जी' की गलती से एक कन्या की मंगली-कुंडली बन गयी, जब घर वाले परेशान होकर मेरे पास आये तो पता चला कि कुंडली गलत बनी थी। अब आप ही बताईये, बेवजह ही उस निर्दोष कन्या को बड़े होकर 'मंगली' होने का दंश झेलना पड़ता ना?

मुझे पता है, अब आपके मन में एक प्रश्न जरुर आ रहा होगा कि फिर क्यों मंगली-दोष का इतना भय बैठाया गया मन में?
चुपके से कान में सुनिए..... :))
अजी, 'पंडित जी' को पूजा और निवारण के नाम पर दक्षिणा कैसे मिलती?  ऐश्वर्या रॉय का किस्सा तो आपने सुना ही होगा.. आपको ये भी बता दूँ कि इस मंगली-दोष के डर की वजह से पुराने समय में लोगों ने लड़कियों की कुंडली बनवाना ही बंद कर दिया था।

वैसे चलते-२ एक राज की बात बताऊँ...
श्श्श्श... किसी से कहना मत...
आपको पता है, जन्म-समय में सिर्फ २ घंटे आगे-पीछे करके मंगली-दोष ख़त्म किया जा सकता है। कभी-२ तो ये फर्क सिर्फ २ मिनट का होता है। और मजे की बात तो ये है कि लोग अक्सर ऐसा करते भी हैं।

मुझे पता है कि आप इस समय यही सोच रहे हैं कि अगर ऐसा है, तो कहीं जिससे आपकी शादी हुयी है, कहीं वो मंगली तो नहीं..? तो क्या हुआ..?
आप खुश हैं ना..? बस शादी का लड्डू खाईये और मंगलकारी 'मंगल' के गुण गाईये..... :))

                                                                         आपकी शुभाकांक्षी
                                                                                  गायत्री 


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